आज विश्व की सबसे बड़ी ताकत है युवा शक्ति जिसमें सभी लिंग, जाति और धर्म के युवा शामिल हैं। आज वही शक्ति एक होती दिख रही है जिसके उदाहरण स्वरूप पाकिस्तान का युवा वर्ग हिंदुस्तान के उस हर युवा के साथ खड़ा है जो सत्ता के दुर्व्यवहार और विषाक्तता से संक्रमित हो रहा है। बात सिर्फ़ यही नहीं है कि सत्ता की क्रूरताओं को देखकर उनके दिल पसीज गए और न ही वहाँ पर किसी वामपंथी लोगों ने हुजूम इकठ्ठा करवाया, या फिर उन्हें इस बात के लिए पाकिस्तान सरकार से नौकरी या पैसा मिलेगा इसलिए वे समर्थन में सड़कों पर उतर आए। नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। वास्तविकता यह है कि आज हर एक युवा की सोच सभी प्रकार की क्षेत्रगत, जातिगत, धार्मिक और राजनैतिक परिसीमाओं से मुक्त होकर एक समान, सरल और सहज जीवन की कल्पना करती है। यही सबसे बड़ा कारण है कि ये राजनेता (दोनों तरफ से) हम लोगों को हिन्दू मुस्लिम और धर्म नाम का नशा देते रहते हैं और दोनों तरफ के राजनैतिक परिसीमाओं में बंधे आम जनमानस आपस में एक दूसरे की सुनने से इंकार करने लगते हैं। क्योंकि मीडिया जो दिखाती है उसे बिना जाँच पड़ताल के ही हम मासूम (दोनों तरफ के लोग) सहज ही सही मान लेते हैं।
लेकिन सच की सबसे बड़ी ताकत है कि उसे कभी न कभी सामने आ ही जाना है और अब वही हो रहा है। राजनैतिक सीमाओं में बंधे पाकिस्तान के युवा भारत के युवाओं के साथ इसलिए खड़े हैं क्योंकि उनकी सोच और समझ में समानता है। उनके परिकल्पनाओं का देश एक जैसा है, जहाँ सभी धर्मों की जगह होते हुए भी सर्वधर्म और सद्भाव का सम्मान हो न कि धार्मिक और राजनैतिक एजेण्डे का। रविवार को जो जेएनयू में छात्रों के साथ और उसके ठीक पहले जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के साथ हुआ उसे पूरे देश में ही नहीं वरन राजनैतिक और धार्मिक सीमाओं को तोड़ते हुए पूरे विश्व में घृणित क़रार दिया जा चुका है। विश्वविद्यालयों पर यह घृणित हमले किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का उदाहरण नहीं है बल्कि यह एक पूर्णरूपेण रची रचाई साजिश है। चलिए इसे अब सरल तरीके से समझने का प्रयास करते हैं। आज जब भारत और पाकिस्तान के युवा जिन्हें राजनीति से कोई लेना देना तक नहीं है (होता तो यह गन्दी राजनीति न होती याद रहे गन्दी राजनीति नहीं राजनेता हैं), वे सभी प्रकार के सीमाओं को तोड़कर एक साथ खड़े हो रहे हैं। ऐसे में इन स्वार्थी राजनेताओं को भय खाए जा रहा है कि यदि ये युवा वर्ग आपस में मिल गए तो उनकी राजनीति उसी दिन ख़तम हो जाएगी। दोनों देशों में युवाओं की परिकल्पनाओं में एक समानता सामने आ रही है कि उन्हें जाति, धर्म और लिंग आधारित भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को शिक्षा, समान, सहज व सुलभ चिकित्सा, सभी के लिए रोजगार वाला राज्य/देश चाहिए न कि हर दिन तलवार, बन्दूक, खून बलात्कर से रंगा राज्य/देश। यह भी समझने का प्रयास करना चाहिए कि आख़िर विश्वविद्यालयों पर ही हमले क्यों हो रहे हैं। इसका बहुत ही आसान सा पर आसानी से न दिखाई देने वाला उत्तर है, वो यह कि आज विश्वविद्यालय एक नई विचारधारा को, सृजनात्मकता को जन्म देने के साथ समता की भावनाओं, अपने लिए व अपने अधिकारों के लिए जीना सिखाने लगी थीं और यदि यह सब हुआ तो फिर वे राजनेताओं द्वारा फैलाए जाने वाले धार्मिक नशे को लेना बंद कर उन्माद फैलाना बन्द कर देंगे। इतना होते ही इन विश्वविद्यालयों के व युवाओं की परिकल्पनाओं के राज्य/देश की नींव पड़ जाएगी जिसे राजनेता बर्दाश्त नहीं करेंगें क्योंकि इससे उनके वर्चस्व, राजशाही और विलासिता का अन्त हो जाएगा। शायद विकास के नजरिए से न सही पर एकता, सौहार्द, समता, संप्रभुता और मानवीय मूल्यों के आधार पर ही सही पर कलाम जी के सपनों का 2020 का भारत बन सके और इसकी शुरुआत अब युवा शक्ति के रूप में हो चुकी है। आज पाकिस्तान, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, हावर्ड यूनिवर्सिटी और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र भिन्न भिन्न देशों का प्रतिनिधित्व कर युवा शक्ति के रूप में एक हो रहे हैं और विश्वविद्यालयों में घृणित हमले होने पर भारत के साथ खड़े हैं। आज पूरे विश्व को इसी नजरिए (सभी प्रकार की राजनैतिक, धार्मिक कुंठाओं से मुक्त) और युवाशक्ति दरकार है।