जनसामान्य से धोखा क्यों
मंडुआडीह नई दिल्ली सुपरफास्ट के सामान्य कोच से यात्रा करते समय एक ऐसा पक्ष सामने आया जो सच में चौका देने वाला है। सामान्य तौर पर ट्रेन में साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है पर यहां स्थिति इन सब से परे ही थी। ट्रेन के लगभग सभी सामान्य कोचों में पानी के कारण इतनी अधिक गन्दगी थी कि लोगों का बैठना ही एक पहेली बन चुका था। जगह न होने के कारण लोग एक दूसरे को गाली -गलौच भी कर रहे थे। मैंने इस गालियों भरी वार्ता से दरकिनार करते हुए सोचा कि क्यों न स्वयं ही इसकी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा के कोई उपाय निकाला जाए। मैंने तुरंत ही अपना मोबाइल ऑन किया और इंस्टाल किया - 'कोच मित्र एप्लिकेशन'। हैरानी हुई कि एप्लिकेशन में कहीं भी सामान्य कोच की शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई विकल्प ही नहीं था।
अब जो प्रश्न निकल कर सामने आए कोच में चर्चा के दौरान किसी के पास नहीं थे।
१- शौचालयों में पानी की सही आपूर्ति न होने के कारण वँहा भी स्थिति दूभर थी, एक जगह पानी का रिसाव और दूसरी तरफ सही आपूर्ति ही नहीं, क्यों?
२- कुछ को छोड़कर सभी चार्जिंग पॉइंट्स भी खराब थे।
३-आखिर क्यों? क्या सामान्य यात्रियों के टिकट्स को सभी करों से मुक्त रखा जाता है, जो यात्रा के समय सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं से जनसामान्य यात्रियों को वंचित किया जा रहा है?
यह भी हो सकता है कि सरकार के लिए यह बहुत ही आम बातें हों, पर गौर करने की बात है कि जो व्यक्ति सामान्य से यात्रा कर रहा है, वह किसी न किसी रूप में समाज में पिछड़ा ही होगा। उसके लिए यह बहुत ही बड़ी बातें होती हैं, अतः इन सभी प्रश्नों का सरकार से संतुष्ट जवाब उचित और वांछनीय है।
प्रेम कुमार
काशी हिंदू विश्वविद्यालय
वाराणसी
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