कड़ी निंदा या फिर मज़ाक
सुंजवान सैन्य शिविर पर कल सुबह तड़के 4:45 के आस पास जैशे-ए-मोहम्मद के आत्मघाती दस्तों ने हमला किया जिसमें 5 जवान शहीद हो गए.....पर इस हमले की सबसे कायरतापूर्ण पक्ष यह रहा कि इसमें सैनिको के परिवारो को निशाना बनाया गया और इसमें कुछ हद तक वो सफल भी हो गए क्योंकि इस हमले के दौरान एक #JCOसाहेब की बेटी जो स्कूल की छुट्टियों में अपने पिता से मिलने आयी थी, गंभीर रूप से घायल हो गयी है... ..
इस प्रकार के हमले से मुझे कोई आश्चर्य नही होता है लेकिन आश्चर्य तब होता है जब मैं ये देखता हूँ कि सरकार के वो नुमाइंदे जो इसका विरोध कर के सत्ता के तमाम कुर्सियों पर विराजमान है, वो आज निष्क्रियता की सारी हदें पार कर बैठे है....कुछ तथ्यों एवम वादों पे आपका ध्यान ले जाने की कोशिश कर रहा हूँ
1)सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नही मिटने दूंगा मैं देश नही झुकने दूंगा...शायद ये 15-20 फरवरी 2014 के चुनावी प्रचार के दौरान हमारे माननीय प्रधानमंत्री के द्वारा बोली गयी थी..अब इसमें कितनी सार्थकता है ये आप बेहतर समझते है
2) 13 जनवरी 2013 की उस अमानवीय घटना (जहाँ शाहिद सैनिक हेमराज के सर को पाकिस्तानियों के द्वारा बर्बरतापूर्ण क्षतिग्रस्त किया जाना) की निंदा करते हुए तात्कालीन नेता प्रतिपक्ष माननीय सुषमा स्वराज जी ने 1 के बदले 10 सरों की मांग की थी... अब कितने सर आये है...ये हम सब जानते है...!!
3) पिछले 41 दिनों के भीतर 10 जवान शहीद हुए
4) पिछले साढ़े 3 वर्षों में 6 सैन्य शिविर जहाँ सैनिकों की परिवारों की संख्या सबसे ज्यादा है , को निशाना बनाया गया
5) सिज़ फायर और सैनिको की शहादत 2014 से 2018 आते आते दुगिनी हो गयी है...
लेकिन हां एक बात से हम इनकार नही कर सकते कि सर्जिकल स्ट्राइक और क्रॉस बॉर्डर हंट भी इन्ही 3 वर्षो के अंदर हुई है जो शायद हमे हमारे सेना की कविलियात का प्रत्यक्ष प्रमाण देती है....कश्मीर की राजनीतिक मजबूरियों को दरकिनार कर के अगर सेना को ये आदेश निरंतर अंतराल पे मिलता रहे तो शायद इन हमलों की संभावनाओं को कम किया जा सकता है...पर सवाल ये है कि क्या सत्ता में बैठे वो लोग, कुर्सी के मोह को त्याग कर के, राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए , निरतंर ये आदेश देते रहेंगे या इन घटनाओ के उपरांत हम #कड़ी_निंदा सुनने के लिए तैयार रहे...!!
✍️... बादल भैया की कलम से
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