Wednesday, November 14, 2018

आयुष्मान_भारत_योजना_2018

#आयुष्मान_भारत_योजना_2018
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#पूर्ण_विश्लेषण
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#लेख_एक_नज़र_में
      ■ एक नज़र में पूरी योजना।
      ■ योजना की पृष्टभूमि
      ■ आयुष्मान भारत योजना क्या है?
      ■ विशेषताएं।
      ■ कैसे अमल हो, इसकी विवेचना।
      ■ विश्लेषण भाग (हैस टैग के साथ बीच मे भी
          विश्लेषणात्मक लेख मौजूद)

■ #एक_नज़र_में_पूरी_योजना
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     👉 आयुष्मान भारत योजना 2018/ मोदीकेयर
     👉 एक स्वास्थ्य बीमा योजना
     👉 विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना
     👉 21 मार्च 2018 को कैबिनेट से मंजूरी
     👉 10.74 करोड़ परिवारों को योजना से लाभान्वित
            करने का उद्देश्य
     👉 ₹5 लाख तक का इलाज़ मुफ़्त करा सकेंगे
     👉 देश के सभी निजी व सरकारी क्षेत्रों में समान
           रूप से लागू
     👉 14 अप्रैल 2018 को प्रथम चरण की लांचिंग
     👉 23 सितंबर 2018 को  प्रधानमंत्री द्वारा योजना
           को शुरू करने की घोषणा
     👉 25 सितंबर 2018 को योजना लागू
     👉 पात्रता - लाभार्थी कच्चे घर या एक कमरे मे
                       रहता हो
                     - परिवार में 16 से 59 वर्ष की आयु का
                       कोई वयस्क व्यक्ति न हो
                     - मुखिया महिला हो और परिवार में 16
                       से 59 वर्ष का कोई पुरूष सदस्य न हो
                     - विकलांग व दिव्यांग व्यक्ति, परिवार में
                       कोई भी शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति
                       न हो
                     - SC व ST परिवार और भूमिहीन
                       परिवार ,जिनकी आजीविका का मुख्य
                        स्रोत मानवीय श्रम हो।
                     - सामाजिक आर्थिक और जाति
                       जनगणना (SECC 2011) को मानक
                       रखा गया है इस पात्रता के लिए।

■ #योजना_की_पृष्टभूमि
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          2008 में भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment)  ने कैशलेस बीमा योजना शुरू की थी। इस योजना में हर परिवार (5 सदस्यों वाले) को 30 हजार रुपए सालाना बीमा का लाभ मिलना था। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवार और असंगठित क्षेत्र (unorganised workers) के 11 अन्य तय कैटेगरियों में आने वाले परिवार इस योजना का लाभ ले सकते थे।
👉1 अप्रैल 2015 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) को ट्रांसफर कर दिया गया। ताकि योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।
👉1 फरवरी 2018 को केंद्र सरकार के बजट 2018-19 में आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (National Health Protection Scheme-NHPS) की घोषणा की गई। जिसमें पहले से चल रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (Rashtriya Swasthya Bima Yojna-RSBY) और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना (Senior Citizen Health Insurance scheme-SCHIS) को भी मिला दिया गया।

■ #आयुष्मान_भारत_योजना_क्या_है?
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          "आयुष्मान भारत योजना” भारत सरकार के ”स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय” की ओर से शुरू की गई स्वास्थ्य बीमा योजना (Health Insurance Scheme) है। इस योजना में देश के 10.74 करोड़ परिवारों को अस्पताल में इलाज कराने का खर्च नहीं देना होगा। ये परिवार पांच लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त में करा सकेंगे। हर परिवार में औसतन 5 सदस्यों के हिसाब से,  इस योजना से देश के 50 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हो सकेंगे।

आयुष्मान भारत योजना 2018 को ”आयुष्मान भारत बीमा योजना (Ayushman Bharat Insurance Scheme)” या ” जन आरोग्य योजना अभियान (Jan Arogya Yojana Abhiyan)” के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा शुरू की गई ऐसी ही स्वास्थ्य योजना “ओबामाकेयर (Obamacare)” की तर्ज पर मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी येाजना को ”मोदीकेयर (Modicare)” भी कहा जाता है।
(👉 #विश्लेषण 👉 योजना कि आधार पात्रता को देख के स्पष्ट होता है कि सरकार अभी भी जानती और मानती है कि देश में लगभग 11 करोड़ लोग आज भी बिना घर के ही निर्वाहन कर रहे हैं।)

■ #विशेषताएं
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          आयुष्मान भारत योजना को Healthy, Capable and Content New India के उद्देश्य के साथ शुरू किया गया है। इस लक्ष्य को पाने की दिशा में सरकार ने एक साथ दो मोर्चों पर काम शुरू किया है—

देश भर में 1.5 लाख health and wellness Centres स्थापित किए जाएंगे व देश की हर बड़ी पंचायत में स्थित हेल्थ सेंटर और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। जिससे कि पूरे देश में व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इन केंद्रों में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्ध और योग पद्धति से भी इलाज की व्यवस्था होगी।
(👉 #विश्लेषण 👉 देश के 90% क्षेत्रीय सरकारी अस्पतालों की हालत संसाधनों के अभाव से इतनी ख़राब है कि डॉक्टर खुद ही बोल देते हैं कि इससे बेहतर होगा कि आप प्राइवेट इलाज करा लें, जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे।
यँहा समझने वाली बात यह है कि 1.5 लाख हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टर स्थापित करने से बेहतर होगा कि ये इन्हीं अस्पतालों में सभी मूलभूत सुविधाओं पर ख़र्च करें लेकिन फिर उन तमाम सरकार के ठेकेदारों को बिल्डिंग और अन्य हज़ारों कामों के बहाने से जेब भरने का मौका कैसे मिलेगा, और ऐसा न करने से आख़िर योजना पहले ही नहीं शुरू हो जाएगी और सभी को जल्दी से जल्दी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल जाएंगी और फिर वोट किन मुद्दों पर माँगेंगे।
सोचने वाली बात है...।)

        देश के 10.74 करोड़ सुविधाहीन परिवारों के लिए National Health Protection Scheme शुरू की जाएगी, ताकि लोगों को गंभीर बीमारियों या स्वास्थ्य संबंधी समस्या का निशुल्क इलाज हो सके। इस योजना में पहले से मौजूद बीमारियां भी कवर होंगी।
आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ( Ayushman Bharat National Health Protection Mission (ABNHPM) का लाभ देश के 11.74 करोड परिवारों को देने का लक्ष्य रखा गया है। हर परिवार में 5 सदस्यों का औसत माना जाए तो देश की 50 करोड़ से ज्यादा की आबादी इसके दायरे में आती है।
(👉 #विश्लेषण 👉 पूर्व तथा उपरोक्त डेटा से स्पष्ट है कि 121 करोड़ की जनसंख्या में लगभग 45% लोग आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं।)

इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के सुविधाहीन परिवारों (deprived rural families) और शहरी क्षेत्रों के भी कुछ तय पेशों में लगे परिवार (Identified occupational category of urban workers’ families) शामिल किए जाएंगे।
दोनों ही श्रेणियों में लाभार्थी परिवारों को तय करने के लिए सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (Socio-Economic Caste Census 2011(SECC)) के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।

(👉 #विश्लेषण 👉 उपरोक्तानुसार यह कि ऐसे लोग जो 2011 के बाद गरीब हुए हैं उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता है।)

देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (States/UTs) के सभी जिलों में में रहने वाले लोग इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। धीरे-धीरे इसे सभी वर्गों तक पहुंचाने की कोशिश होगी।
👉नीचे दी गई शर्तों में से कोई एक भी शर्त पूरी करने पर आप इस योजना में शामिल होंगे।
●ऐसा परिवार जो कच्ची दीवार वाले एक कमरे वाले कच्चे मकान या छप्पर में रह रहा हो।
●ऐसे परिवार, जिनमें 16 से 59 वर्ष की उम्र तक का कोई वयस्क सदस्य न हो।
●ऐसे परिवार, जिसकी जिम्मेदारी कोई महिला संभाल रही हो और उसके परिवार में कोई 16 से 59 वर्ष तक का पुरुष सदस्य न हो।
●शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति, जिसके परिवार में कोई भी शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति न हो
●एससी एसटी परिवार और भूमिहीन परिवार ,जिनकी आजीविका का मुख्य स्रोत मानवीय श्रम हो।

(👉 #विश्लेषण 👉
#पात्रता_बड़ी_मज़ेदार👇👇
ऐसा परिवार जो कच्ची दीवार वाले मकान में रहता है, उसके पास न तो योजना को जानने का कोई साधन है न ही सुविधा, 16 से 59 वर्ष का सदस्य न हो - स्पष्ट है कि आप कहीं भी कार्यालयों में देख सकते हैं कि बच्चों को कोई अहमियत नहीं दी जाती और बुजुर्ग वर्ग इतनी भागदौड़ करने की हिम्मत खो चुका होता है। आप जिन आयुष्मान मित्र की बात कर रहे हैं वह इस तंत्र से पूर्वग्रसित नीति अपनाते हुए एक घर मे बैठ कर 5 घरों का आंकड़ा भर देते हैं जिससे बाद में नाम, पता और अन्य कई प्रकार की त्रुटियों के चलते वह योजना ख़त्म होने तक सिर्फ एक प्लास्टिक का कार्ड बन कर रहा जाता है। या फिर पैसे के लालच में आकर ऐसी योजनाएं परिवारवाद जैसी रुढियों का शिकार होकर कुछ घरों तक ही सीमित हो जाती हैं। महिला मुखिया के संदर्भ में बात करे तो नारी सशक्तिकरण व शिक्षा सम्बन्धित रोज रैलियों से हम सभी सरोकार होते हैं अतः स्पष्ट है कि आप उन महिलाओं कितनी सुनेंगे जिन्हें इस बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। और तो और क्या उस गरीब परिवार में 16 से 59 वर्ष की आयु के व्यक्ति को बीमारी के रूप में सौगात मिली है क्या जो उन्हें इन दायरों से बाहर रखा गया।
        अब ग़ौर करने वाली बात यह है कि ऐसे परिवार जिनमे 16 से 59 आयु वर्ग के सदस्य नहीं होंगे ऐसे में सिर्फ़ वर्तमान नैतिकता के विरुद्ध बच्चों द्वारा निरसित बूढ़े माँ-बाप ही बचते हैं, कुछ एक को छोड़कर। ऊपर से वो कच्चे घर में रहते हों। कुछ इन पात्रताओं के आधार पर आप सिर्फ कुछ ही परिवारों को पाएँगे। इस प्रकार से उन 50 करोड़ लोगों में से 25 करोड़ लगभग ऐसे ही बाहर हो गए। और जो लोग झुग्गियों में रहते हैं उनकी प्रकृति से आप सभी परिचित हैं कि उनकी पहुँच उनके हक के राशन कार्ड तक नहीं होती कारण यह बता दिया जाता है कि उनके पास उक्त स्थान का निवास प्रमाण पत्र (झुग्गीवासियों की सबसे बड़ी समस्या) नहीं है, (यह प्रमाण पत्रों वाली प्रक्रियाएं कितनी खर्चीली व जटिल इससे आप भलीभाँति परिचित हैं, ऐसे परिवार इन प्रमाण पत्रों के खर्च निर्वहन करें या दो जून की रोटी की व्यवस्था करें) इसलिए वो हमेशा चुपचाप रह उनकी बस्तियों में हुए विकास कार्यों जैसी योजनाओं का ही लाभ ले पाते हैं। और तो और स्पष्ट रूप से यही तंत्र स्वयं ही योजनाओं को उन तक नहीं पहुचने देता है।
  ऐसे विकलांग व्यक्ति बिरले ही मिलेंगें जिनके परिवार में कोई शारिरिक सक्षम व्यक्ति न हो। तब वह भी इस योजना का पात्र नहीं रह गया।
  एससी एसटी व भूमिहीन परिवार जिनका आजीविका का मुख्य स्रोत मानवीय श्रम हो - कहते हुए कोई झिझक नहीं है कि जो समाज ऐसी सामाजिक कुरीतियों का शिकार आज भी हो जँहा एससी एसटी के लोगों को जातिगत रूप से आज भी प्रताड़ित होना पड़ता हो (उदाहरण के तौर पर हम देश के वर्तमान महामहिम राष्ट्रपति जी व उनके परिवार के साथ घटी पुष्कर मन्दिर की घटना सामने है, तो आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कौन एससी एसटी का व्यक्ति इस छुआछूत से बच सकता जब एक एससी राष्टपति स्वयं न सुरक्षित हो) और भंगी व मेथर जैसी जातियों के पास तक अभी भी उठना बैठना तो दूर पास तक नही जाते, तो क्या आपके ये चुनिंदा आयुष्मान मित्र उनके पास जाएंगे, या फिर दूसरे के घर से ही उनका भी डेटा भर जाएगा..?
आख़िर कौन इन दोगली पात्रताओं पर खरा उतर पाएगा, अब तो इसका जवाब कुछ महीनों बाद RTI से ही पता लग सकेगा कि उस वक्त तक कितने लोग इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।
      बचे खुचे चुनिन्दा लोग जिनका बीमा हो भी जाता है उन्हें यह निजीकरण की नीतियां कुचल कर रख देंगी। आपके आयुष्मान मित्र सिर्फ़ उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में ही भेजने का कष्ट करेंगें, कारण कम इलाज के बदले बड़ा बिल फाड़ने को व उसके बाद अच्छी कमीशन जो जेब में बनेगी। अब आप स्वयं अंदाज लगा सकते हैं कि यह योजना गरीबों के स्वास्थ्य कवर करेगी या नेताओं की जेबें।)

■ #कैसे_अमल_हो_इसकी_विवेचना।
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👉योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी Ayushman Bharat National Health Protection Mission Agency (AB-NHPMA) को दिया गया है।
👉इस योजना पर आने वाले खर्च का 60 प्रतिशत केन्द्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार उठाएगी।
👉राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों (States/ UTs) को भी अपने यहां इस योजना को संचालित करने के लिए State Health Agency (SHA) बनाने को कहा गया है। हालांकि वे अपनी सुविधानुसार पहले से मौजूद Trust/ Society/ गैर लाभकारी संस्था/ State Nodal Agency (SNA) को भी यह काम सौंप सकते हैं। या फिर कोई नई संस्था (entity) या एजेंसी भी गठित कर सकते हैं।
👉राज्य या केंद्र शासित प्रदेश चाहें तो इस योजना के क्रियान्वयन  implementation का जिम्मा, किसी insurance company को सौंप दें, या फिर निर्धारित Trust/ Society को ही संचालन का जिम्मा दे दें।
योजना के तहत होने वाले कुल खर्च का 60 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी और 40 फीसदी राज्य सरकारें वहन करेंगी। शुरुआती दो साल में 10,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
👉योजना क चलाने के लिए सरकार आयुष्मान मित्र की नियुक्त कर रही है। ये लोग अस्पतालों में बैठेंगे और लाभार्थियों की मदद करेंगे। इससे अस्पताल का काम भी आसान हो जाएगा।

👉 #विश्लेषण 👉 आपको पढ़कर व समझकर स्पष्ट होगा कि किस तरह से प्राइवेट सेक्टरों को मजबूत करने की पूर्ण तैयारी है। केन्द्र या राज्य सरकार में बैठे कौन से नेतागण नही चाहेंगे कि प्राइवेट सेक्टर जँहा से सबसे ज्यादा जेबें गरम होती हैं उन्हें यह टेंडर न मिले। बाकी आप स्वयं समझदार हैं।🤝🤝👍

✍️ विश्लेषण से जो कुछ पहलू जो छूट रहें हैं उन्हें अगले स्वतंत्र लेख में लाने को प्रयासरत✍️

                                           ✍️ प्रेम कुमार
                                           दर्शनशास्त्र विभाग
                                     काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
                                                 वाराणसी

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