Sunday, January 15, 2017

शिक्षा जगत पर प्रश्न

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को देखकर आज हर युवा कुछ कर गुजरने का जुनून रखता है, वह इसलिए क्योंकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर सरकार को स्वयं भरोसा नहीं है| ऐसा कुछ विशेष तथ्यों से स्पष्ट होता है, जैसे शिक्षा की 70% कमान प्राइवेट सेक्टर में होना, जिसके कारण शिक्षा के क्षेत्र में पूर्णतया कालाबाजारी हो रही है,  देश के उनहत्तर प्रतिशत सरकारी कर्मचारी, (जिसमें अधिकारी वर्ग से लेकर शिक्षक वर्ग भी शामिल है) अपने बच्चों को प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाने में शान समझते हैं|
           ऐसे में शिक्षक चयन समिति पर प्रश्न खड़ा करने जैसा है कि क्या वह प्राइमरी स्तर के शिक्षक देश के स्कूलों को नहीं दे पा रहा है जो स्वयं अपने बच्चों को नहीं पढ़ा सकता? ऊपर से आए दिन यही शिक्षक वर्ग अपने शिक्षक धर्म का हवाला देकर अपने वेतन, भत्ते बढ़ाने को लेकर धरना देते हैं| आखिर जब आप पढ़ाने में लापरवाही कर रहे हैं तो अधिक वेतन किसलिए?
     प्रतिवर्ष कितने ही करोड़ शिक्षा के नाम पर खर्च होता है पर देश की साक्षरता मात्र 74.04%  ही है| ग्रामीण क्षेत्र के मात्र दस प्रतिशत छात्र ही उच्चतर शिक्षा ग्रहण कर किसी उच्च पद पर आसीन होगें| जो बहुत ही चिंता का विषय है |
             सरकार को बहुत अधिक दिखावा करने की जरूरत नहीं है बस छोटे से कदम (सभी सरकारी व गैर-सरकारी कर्मचारी अपने बच्चों को सरकारी, प्राइमरी स्कूल में ही आवश्यक शिक्षा) से पूरे शिक्षा जगत की तस्वीर ही बदल जाएगी| यह कदम भी उठाना किसी स्ट्राइक से कम न होगा लेकिन उज्ज्वल भविष्य के साथ शिक्षा जगत पर फिर कोई प्रश्न नहीं खड़ा कर सकेगा|
                                 छात्र प्रेम कुमार
                            का.हि.वि.वि. वाराणसी

No comments:

Post a Comment

Expanding Parliament & Shrinking Democracy

     The ongoing debates around delimitation, women’s reservation, and proposals such as “ One Nation, One Election ” are not isolated refo...